पलामू जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल पर्व हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर जिले के सभी प्रखंडों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी समुदाय में विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने अखरा में एकत्र होकर धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अनुष्ठान संपन्न किया, जिसे पाहन द्वारा पारंपरिक पद्धति से सम्पन्न कराया गया।
जिला मुख्यालय मेदिनीनगर स्थित जीएलए कॉलेज के जेएन दीक्षित छात्रावास परिसर के अखरा में भी सरहुल पूजा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आदिवासी छात्र संघ के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ, जिसमें जिला पाहन इन्द्रदेव उरांव ने विधिवत पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर आदिवासी छात्र-छात्राओं ने उपवास रखकर साल वृक्ष की डाली की पूजा की तथा जीवन में सुख-शांति की कामना की।समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नीलाम्बर-पिताम्बर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने अखरा में पूजा-अर्चना करने के उपरांत मांदर की थाप पर सहभागिता भी प्रदर्शित की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति से गहरे संबंध और प्रेम का प्रतीक है। यह केवल आदिवासी समाज तक सीमित न होकर सम्पूर्ण मानव समुदाय को प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि वृक्षों एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विशिष्ट अतिथि समाजसेवी ज्ञानचंद पांडेय ने सरहुल को आस्था और प्रकृति से जुड़े महत्वपूर्ण पर्व के रूप में निरूपित करते हुए इसके सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, महोत्सव के पूर्व संयोजक डॉ. कैलाश उरांव ने कहा कि प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना असंभव है, अतः आधुनिक युग में युवाओं एवं बुद्धिजीवियों का दायित्व है कि वे इस पर्व के मूल संदेशों को आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम का संचालन पूनम कुजूर ने किया। इस अवसर पर छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया तथा युवाओं ने पारंपरिक गीत एवं नृत्य के माध्यम से उत्सव को जीवंत बनाया। समारोह में विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यूओ डॉ. एस.के. पांडेय, प्रोक्टर डॉ. आर.के. झा, वित्त पदाधिकारी डॉ. विमल कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अजीत सेठ, प्राचार्य डॉ. जसवीर बगा, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, प्रोफेसर बर्नाड, रंजन यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
