मेदिनीनगर, प्रतिनिधि—
शहर के रांची रोड स्थित मथुराबाड़ी के नवनिर्मित मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान जारी है। इस अवसर पर 12 कुंडीय रुद्र महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। वृंदावन से पधारी साध्वी कृष्णा प्रिया श्रद्धालुओं को शिव महापुराण कथा का रसपान करा रही हैं।
बुधवार को महाराजा पैलेस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साध्वी कृष्णा प्रिया ने कहा कि भगवान विष्णु का अवतार परशुराम के रूप में हुआ था। उन्होंने अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष किया तथा अत्याचार का प्रतीक बन चुके क्षत्रिय राजाओं का संहार कर धर्म और न्याय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म के विरुद्ध आचरण करता है, उसे दंड मिलना स्वाभाविक है। समाज में न्याय और धर्म की स्थापना के लिए भगवान परशुराम ने पुरुषार्थ किया।
साध्वी कृष्णा प्रिया ने कहा कि सनातन धर्म समाज को समानता, एकता और न्याय का संदेश देता है। सनातन धर्म कोई मजहब या संप्रदाय नहीं, बल्कि अनादिकाल से चली आ रही जीवन पद्धति है। इससे जुड़ने वाला व्यक्ति अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर होता है और इसकी आध्यात्मिक शक्ति मनुष्य को सच्चे अर्थों में इंसान बनाती है। इस धर्म का पालन करने वाले लोग सत्कर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हैं।
उन्होंने कहा कि सदाचार और धर्म के मूल तत्वों से जुड़ा रहना ही सनातन धर्म की मूल शिक्षा है। धर्म के विरुद्ध आचरण उचित नहीं है और सभी क्रियाकलाप धर्म के अनुरूप होने चाहिए। समाज में समानता और एकरूपता लाने के लिए राजनीति भी धर्म के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। धर्म से विमुख होने पर व्यक्ति समाज में विध्वंसकारी कार्यों की ओर अग्रसर हो जाता है। इसलिए धर्मनीति के अनुरूप आचरण और व्यवहार आवश्यक है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
